भारत 2026 में 60 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ने की राह पर: यूएनजीए में बोले रिन्यू के सुमंत सिन्हा
भारत 2026 में 60 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ने की राह पर: यूएनजीए में बोले रिन्यू के सुमंत सिन्हा

जयपुर, 02 अक्टूबर , 2026: भारत 2026 में 60 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ने की राह पर है। रिन्यूएबल एनर्जी के तेजी से बढ़ते विस्तार के बीच रिन्यू के फाउंडर, चेयरमैन और सीईओ सुमंत सिन्हा ने न्यूयॉर्क क्लाइमेट वीक के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक हाई-लेवल सेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही।
इस सेशन को संबोधित करने वाले वह एकमात्र प्राइवेट सेक्टर लीडर थे। उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी को बड़े स्तर पर बढ़ाने में भारत की प्रगति पर बात की और कहा कि राष्ट्रीय और वैश्विक क्लाइमेट कमिटमेंट्स को जमीन पर उतारने में बिजनेस की अहम भूमिका है।
उन्होंने बताया कि भारत ने 2025 में अपने पेरिस एग्रीमेंट के उस लक्ष्य को हासिल कर लिया, जिसके तहत 2030 तक एनर्जी मिक्स में 50% हिस्सा नॉन-फॉसिल फ्यूल सोर्सेज से हासिल करना था। भारत ने यह लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया। 2025 में देश ने करीब 44 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी, जो दुनिया में एक साल में दूसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। इस साल इसमें काफी ज्यादा बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी से लोगों के करीब पहुंच रहा एनर्जी ट्रांजिशन
सिन्हा ने कहा कि 2026 में जुड़ने वाली रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का एक बड़ा हिस्सा डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी से आएगा। इसमें करीब 15 गीगावॉट रूफटॉप सोलर और सोलर पंप शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी जनरेशन से क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन लोगों के लिए ज्यादा आसान और समझने योग्य बन रहा है।
“इन डिस्ट्रिब्यूटेड सोलर क्षमता में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। भारत में आम लोग क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन से बहुत करीब से जुड़े हैं और इसका असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है।”
प्राइवेट सेक्टर ने करीब 300 अरब डॉलर की पूंजी जुटाई
सिन्हा ने पिछले डेढ़ दशक में भारत के क्लीन एनर्जी विस्तार को बढ़ावा देने में प्राइवेट सेक्टर के निवेश की भूमिका पर भी बात की।
सिन्हा के मुताबिक, पिछले 10 से 15 वर्षों में प्राइवेट सेक्टर ने भारत के रिन्यूएबल एनर्जी इकोसिस्टम को तैयार करने के लिए करीब 300 अरब अमेरिकी डॉलर की पूंजी जुटाई है। इसमें पावर जनरेशन, ट्रांसमिशन और अब तेजी से बढ़ते एनर्जी स्टोरेज का क्षेत्र शामिल है।
उन्होंने राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल एनर्जी के विकास का भी जिक्र किया, जिसमें विंड, सोलर और स्टोरेज को एक साथ इस्तेमाल करके ज्यादा भरोसेमंद और लगातार बिजली उपलब्ध कराई जाती है।
रिन्यू ने भारत में इस तरह के सॉल्यूशंस को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। कंपनी रिन्यूएबल एनर्जी जनरेशन को स्टोरेज के साथ जोड़कर सुबह और शाम बिजली की ज्यादा मांग के समय सप्लाई उपलब्ध कराने और तेजी से प्रतिस्पर्धी लागत पर लगातार बिजली देने के लिए काम कर रही है।
सिन्हा ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी जनरेशन और स्टोरेज को एक साथ इस्तेमाल करने की क्षमता ग्रिड तक रिन्यूएबल पावर पहुंचाने के तरीके को बदल रही है। इससे प्राइवेट सेक्टर की भूमिका सिर्फ कितनी क्लीन एनर्जी पैदा होती है, इसे तय करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी तय करने में बढ़ेगी कि यह बिजली उपभोक्ताओं के लिए कब उपलब्ध होगी।
सरकार और प्राइवेट सेक्टर के सहयोग की अहम भूमिका
सिन्हा ने भारत की तेजी से हुई प्रगति का श्रेय सरकार के लक्ष्यों, नीतिगत समर्थन और पब्लिक व प्राइवेट सेक्टर के लगातार सहयोग को दिया।
उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी के लिए बड़े लक्ष्य तय करने, पावर ऑफटेकर्स की क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत करने और ज्यादा रिन्यूएबल पावर को ग्रिड से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय ट्रांसमिशन ग्रिड तैयार करने में सरकार की भूमिका को अहम बताया।
उन्होंने सोलर, बैटरी और दूसरी क्लीन टेक्नोलॉजी से जुड़े घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को तैयार करने पर बढ़ते फोकस का भी जिक्र किया। इससे भारत की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत हो सकती है और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
“प्राइवेट सेक्टर और सरकार के बीच बहुत गहरा सहयोग रहा है। मेरा मानना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलकर काम करने में यह सहयोग बेहद महत्वपूर्ण रहा है।”
एनर्जी ट्रांजिशन के अगले चरण में ग्रिड, स्टोरेज और इलेक्ट्रिफिकेशन पर फोकस
भारत में अब करीब 300 गीगावॉट नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता होने के साथ सिन्हा ने कहा कि एनर्जी ट्रांजिशन के अगले चरण में ग्रिड मैनेजमेंट, एनर्जी स्टोरेज और इलेक्ट्रिफिकेशन पर ज्यादा फोकस करना होगा।
रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ ग्रिड को मजबूत करना और बड़े स्तर पर स्टोरेज की सुविधा तैयार करना जरूरी होगा। इससे रिन्यूएबल एनर्जी जनरेशन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने और लोगों को लगातार बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
सिन्हा ने अलग-अलग सेक्टर्स में इलेक्ट्रिफिकेशन पर भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने सीओपी31 के 2035 तक 35% इलेक्ट्रिफिकेशन के लक्ष्य के साथ 2030 तक दुनिया की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को तीन गुना करने के वैश्विक लक्ष्य का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि एनर्जी ट्रांजिशन में सभी लोगों को साथ लेकर चलना जरूरी है, ताकि क्लीन एनर्जी का फायदा दुनियाभर के समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच सके।
सिन्हा ने कहा कि भारत का अनुभव बताता है कि तेज आर्थिक विकास और बड़े स्तर पर क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। अगले चरण में ग्रिड, स्टोरेज, मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी एक्सेस में निवेश बढ़ाने के लिए सरकारों और बिजनेस के बीच लगातार सहयोग की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि भारत की रिन्यूएबल एनर्जी यात्रा अब सिर्फ नई क्षमता जोड़ने तक सीमित नहीं है। अब फोकस रिन्यूएबल एनर्जी को पूरे एनर्जी सिस्टम से जोड़ने और क्लीन पावर को ज्यादा भरोसेमंद, आसानी से उपलब्ध और सभी के लिए सुलभ बनाने पर है।
